Back

प्रकाशन/अध्ययन

 

  1. भारतीय विधि-संस्थान (आईएलआई) द्वारा केन्द्रीय विधियों का अध्ययन

 

पंचायती राज मंत्रालय ने 15 मई, 2008 को तीन केन्द्रीय अधिनियमों अर्थात् खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957, भारतीय वन अधिनियम (आईएफए), 1927 तथा वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 पर भारतीय विधि संस्थान (आईएलआई) द्वारा एक अध्ययन संचालित कराया जिसका उद्देश्य इन्हें पेसा के अनुकूल बनाने के लिए उनमें संशोधनों का सुझाव देना था । अध्ययन रिपोर्ट संबंधित केन्द्रीय मंत्रालयों को आवश्यक कार्रवाई के लिए 2009 के दौरान भेजी गई थी । पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) भारतीय वन अधिनियम, 1927 में, विशेष रुप से अधिनियम की धारा 68 में संशोधन करने के लिए सहमत हुआ जिसके तहत अधिनियम के अंतर्गत अपराधों का प्रशमन करते समय संबंधित ग्राम सभा के विचार प्राप्त करना शामिल था। पंचायती राज मंत्रालय ने भी वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के कतिपय उपबंधों के संबंध में पर्यावरण वन, और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सुझाव दिए जिससे कि अधिनियम को पेसा के अनुरुप बनाया जा सके ।

 

केन्द्रीय विधियों पर आईएलआई के अध्ययन की पूरी रिपोर्ट का अवलोकन यहां किया जा  सकता  है ।

 

  1. पर्यावरण-विधि रक्षा फर्म (ईएलडीएफ) द्वारा राज्य विषयक विधियों का अध्ययन

पंचायती राज मंत्रालय ने राज्य पंचायती राज विधियों तथा अन्य विषयक विधियों का पेसा के उपबंधों के अनुरुप कार्यान्वन किए जाने के संबंध में जनवरी, 2011 के दौरान पर्यावरण-विधि रक्षा फर्म (ईएलडीएफ) द्वारा एक अध्ययन संचालित कराया । राज्यवार रिपोर्टों ने भी राज्य विधियों को पेसा के अनुरुप बनाने के लिए उनमें से प्रत्येक में परिवर्तन/संशोधित किए जाने का सुझाव दिया । ईएलडीएफ रिपोर्टों को राज्यों को इस अनुरोध के साथ भेजा गया है कि वे उनमें आवश्यक संशोधन करें, नियम तैयार करें, आदि । पांचवी अनुसूची के क्षेत्र रखने वाले सभी राज्यों ने रिपोर्ट की संवीक्षा कर ली है तथा तदनुसार उनकी विधियों/नियमों में संशोधन करने के लिए कार्रवाई भी आरंभ कर दी है ।

 

ईएलडीएफ द्वारा राज्य विधियों के अध्ययन की राज्यवार पूर्ण रिपोर्टें नीचे दिए गए अनुसार प्राप्त की जा सकती है :

 

आंध्र प्रदेश

झारखंड

हिमाचल प्रदेश

छत्तीसगढ़

मध्य प्रदेश

गुजरात

महाराष्ट्र

ओड़िशा

राजस्थान

 

 

3.    राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान तथा पंचायती राज (एनआईआरडी एवं पीआर) द्वारा पेसा पर प्रशिक्षण नियमावली तैयार करने के लिए कार्य-अनुसंधान

पंचायती राज मंत्रालय ने पेसा पर प्रशिक्षण नियमावली तैयार करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा एक कार्य-अनुसंधान अध्ययन संचालित किया । एनआईआरडी एवं पीआर द्वारा तैयार किया गया प्रशिक्षण मैनुअल मई, 2009 में सभी पेसा राज्यों को अग्रेषित किया गया था तथा उनसे अनुरोध किया गया था कि वे पीआरआईज़ जिला और खण्ड स्तरीय अधिकारियों, और पीआरआई के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण प्रदान करें । पंचायती राज मंत्रालय तथा एनआईआरडी एवं पीआर ने एसआईआरडी और राज्य विभागों के लिए पेसा के क्रियान्वयन पर कार्यशालाएं आयोजित की जिनका मुख्य उद्देश्य इस प्रकार था :

  • राज्यों को पेसा पर उनकी अपनी प्रशिक्षण नियमावलियां तैयार करने के लिए सहयोग और सहायता प्रदान करना ।
  • प्रत्येक राज्य से निर्वाचित प्रतिनिधियों की क्षमता के निर्माण के लिए प्रशिक्षण योजना तैयार करना ।
  • सरकारी पदाधिकारियों के वार्षिक प्रशिक्षण के लिए एक ढांचा तैयार करने के लिए राज्यों को सहायता/मार्गदर्शन करना ।
  • पांचवी अनुसूची के क्षेत्रों के संघटकों और समन्वयकों की तैनाती के लिए खाका/ढांचा तैयार करने में राज्यों की सहायता करना ।

 

एनआईआरडी एवं पीआर द्वारा तैयार किए गए पूर्ण पेसा प्रशिक्षण मैनुअल का अवलोकन यहां किया जा सकता है :

 

4. पांचवी अनुसूची (पेसा) क्षेत्रों में समुदाय संघटन पर पुस्तिका :

 

मंत्रालय ने यूएनडीपी और एनआईआरडी एवं पीआर की तकनीकी सहायता से ग्राम सभा संघटकों और पेसा समन्वयकों के लिए पांचवीं अनुसूची (पेसा) क्षेत्रों में समुदाय संघटन पर एक पुस्तिका तैयार की । इस पुस्तिका का विमोचन राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस अर्थात् 24 अप्रैल, 2015 को किया गया तथा इस पुस्तिका में पेसा के उपबंधों, समुदाय संघटन के सिद्धांतों और प्रक्रियाओं तथा ग्राम सभा/समुदाय संघटकों और पेसा समन्वयकों की भूमिका के बारे में आधारभूत जानकारी शामिल है ।

 

पांचवी अनुसूची (पेसा) क्षेत्रों के समुदाय संघटकों पर पुस्तिका का अवलोकन यहां किया जा सकता है :-