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"पेसा अधिनियम के कार्यान्वयन: मुद्दे और भावी कदम" विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला, फरवरी, 2016

राज्यों में पेसा के कार्यान्वयन की प्रगति, कार्यान्वयन में सामने आने वाले मुद्दे और चुनौतियों तथा भावी कदम की समीक्षा करने के लिए, 4-5 फरवरी, 2016 को नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई थी। कार्यशाला में पंचायती राज संघ के केंद्र और राज्य मंत्रियों तथा राज्य सचिवों एवं जनजाति कल्याण विभागों, केंद्रीय मंत्रालयों के अधिकारियों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। इसमें की गई मुख्य सिफारिशें निम्नलिखित हैं:

 

  1. पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों (पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों ) में ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के लिए अलग से दिशानिर्देश तैयार करने और पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में मनरेगा की गतिविधियों की योजना के लिए मसौदा दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) के परामर्श से एक समूह का गठन किया जा सकता है।
  2. पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह के गठन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन(एनआरएलएम) को प्राथमिकता के आधार पर आरंभ किया जा सकता है
  3. राष्‍ट्रीय ग्रामीण विकास संस्‍थान एवं पंचायती राज के केंद्र संस्थान से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में पेसा के कार्यान्वयन का मूल्यांकन करने का अनुरोध किया जा सकता है
  4. पंचायती राज मंत्रालय पेसा के प्रावधानों का विश्लेषण कर सकता है और भूमि अधिग्रहण, मादक द्रव्यों के नियंत्रण, ऋण देने, भूमि हस्तान्तरण से संबंधित प्रावधानों, आदि की व्याख्या पर परामर्श दे सकता है।
  5. पंचायती राज मंत्रालय और 4 (ओ) के अर्थ पर कानून मंत्रालय से परामर्श कर सकता है और आवश्यक सलाह जारी कर सकता है।
  6. पंचायती राज मंत्रालय पेसा के संचालन पर एक विस्तृत परामर्शिका जारी कर सकता है
  7. संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के परामर्श से पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में संयुक्त कार्य समूह जैसी समानांतर समितियों पर एक परामर्शिका तैयार किया जा सकता है
  8. पेसा के कार्यान्वयन में श्रेष्‍ठ कार्यों/सर्वोत्‍तम कार्यों का दस्तावेजीकरण किया जा सकता है और इन्हें सभी राज्यों को  परिचालित किया जा सकता है
  9. पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में बंधुआ श्रम (उन्मूलन) अधिनियम को लागू करने और संकट पलायन की समस्या के समाधान में ग्राम सभा की भूमिका पर एक परामर्शिका  तैयार की जा सकती है।
  10. राष्‍ट्रीय ग्रामीण विकास संस्‍थान एवं पंचायती राज का केंद्र संस्थान, ग्रामीण विकास के राज्य संस्थान के परामर्श से पेसा के कार्यान्वयन के लिए राज्य विशिष्ट क्षमता के निर्माण की योजना को विकसित कर सकता है, जिसमें नागरिक शिक्षा और वीडियो और ऑडियो सामग्री तथा स्थानीय बोलियों के उपयोग को शामिल किया जा सकता हैं।  क्षमता निर्माण में गैर सरकारी संगठनों की भूमिका भी स्पष्ट की जा सकती है।
  11. पंचायती राज मंत्रालय पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पंचायत क्षेत्रों के शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में रूपांतरण के मुद्दे का समाधान करने के लिए कार्रवाई आरंभ कर सकता है और एक परामर्शिका जारी कर सकता है।
  12. पंचायती राज मंत्रालय गृह मंत्रालय के परामर्श से यह निर्णय कर सकता है कि पेसा के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए संविधान की पांचवीं अनुसूची के पैरा 3 और पैरा  5.1 का किस तरह से उपयोग किया जा सकता है
  13. पंचायती राज मंत्रालय पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों के संबंध में माननीय राज्यपालों के कार्यालय द्वारा अपनी संवैधानिक भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाने पर भी अनुवर्ती कार्रवाई कर सकता है।
  14. भारतीय जन संचार संस्थान द्वारा चिह्नित पंचायती राज मंत्रालय की समग्र संचार योजना के हिस्से के रूप में पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में संचार पर एक घटक तैयार किया जा सकता है।

 

  1. पंचायती राज मंत्रालय पेसा के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पंचायती राज, जनजातीय कार्य, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, गृह मंत्रालय और खान मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करने का नेतृत्व करेगा।
  2. पंचायती राज मंत्रालय पेसा के संशोधनों को गति देगा। इस समय के दौरान, राज्य पेसा में किए जाने वाले संशोधनों का इंतजार किए बिना पेसा नियमों की तैयारी और अधिसूचना के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
  3.  पंचायती राज मंत्रालय संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों को उनके प्रासंगिक केंद्रीय कानूनों को पेसा के अनुरूप बनाने के लिए उनमें संशोधन करने के लिए कह सकता है।

 

  1. पंचायतों की रिपोर्ट के अगले चरण में, राज्यों द्वारा विभिन्न अधिनियमों और नियमों में संशोधनों को दस्तावेज़ित करने और पेसा को परिचालित करने के लिए उनकी पर्याप्तता का आकलन करने के लिए विशेष प्रयास किया जाएगा।
  2. पंचायती राज मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय के परामर्श से राज्यों के लिए एक परामर्शिका जारी कर सकता है कि किस विभाग को पेसा के कार्यान्वयन के लिए आदर्श प्रमुख(नोडल) विभाग होना चाहिए।
  3. विभिन्न अधिनियमों और नियमों में संशोधन पर सुझाव देने के लिए और गतिविधियों एवं समय सीमा के साथ राज्य की कार्रवाई योजना तैयार करने के लिए एक "लेखन कार्यशाला" आयोजित की जा सकती है।
  4. पंचायती राज मंत्रालय पेसा से संबंधित विषयों के अनुसंधान के लिए समर्थन प्रदान कर सकता है।
  5.  राज्यों के परामर्श से प्रत्येक राज्य में पेसा के कार्यान्वयन के संबंध में कम से कम एक 'मार्गदर्शक (बीकन) ग्राम पंचायत' को पोषित किया जा सकता है।
  6. पंचायती राज मंत्रालय मौजूदा स्थिति और सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रसार करने के लिए एक पेसा पोर्टल विकसित कर सकता है।

 

राष्ट्रीय कार्यशाला की पूर्ण कार्यवाही यहाँ देखी जा सकती है।