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अक्स र पूछे जाने वाले प्रश्न्/एफएक्यूं

प्रश्न 1: पेसा क्या है?

 

उत्तर: यह एक केंद्रीय कानून है, जो संविधान के नौवें भाग में दिए गए पंचायतों के प्रावधान को कुछ संशोधनों और छूट के साथ पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों के लिए विस्तारित करता है। इन क्षेत्रों में जनजातीय आबादी की प्रधानता है। यह अधिनियम "पंचायतों के प्रावधान का (अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विस्तार) अधिनियम, 1996 "कहा जाता है। संक्षिप्त रूप में इसे

''पेसा''  कहते हैं।

 

प्रश्न 2: पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों वाले कितने राज्यों को पेसा के अंतर्गत आवृत किया गया है?

उत्तर: दस राज्यों में पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र हैं, जिन पर पेसा लागू होता है। ये राज्य हैं आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और तेलंगाना।

 

प्रश्न 3: पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का अधिकार किस समुदाय को है?

 

उत्तर: पेसा के अंतर्गत आवृत क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं के अध्यक्षों के सभी पद जनजातीय समुदाय के लिए आरक्षित हैं और केवल आदिवासी समुदाय के व्यक्ति इन पदों के लिए चुनाव लड़ सकते हैं।

प्रश्न 4: पेसा के अंतर्गत ग्राम सभा को कौन सी महत्वपूर्ण शक्तियां प्रदान की गई हैं?

उत्तर: निम्न की रक्षा करना और बनाए रखना

  

(क) लोगों के रिवाज और परंपराएं, और उनकी सांस्कृतिक पहचान,

(ख) सामुदायिक संसाधन, और

(ग) विवाद समाधान के परंपरागत तरीके

 

(ii) इनके लिए कार्यकारी कार्य करना

 

 (क) सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं को मंजूरी देना;

(ख) गरीबी उन्मूलन और अन्य कार्यक्रमों के अंतर्गत लाभार्थियों के रूप में व्यक्तियों की पहचान; तथा

(ग) योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए पंचायत द्वारा धन के उपयोग का एक प्रमाण पत्र जारी करना;

 

 

प्रश्न 5: पेसा अधिनियम के अंतर्गत उचित स्तर पर ग्राम सभा/पंचायतों को कौन सी शक्तियां दी गई हैं?

उत्तर:

 

  1. भूमि अधिग्रहण, पुनरुद्धार और विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए अनिवार्य परामर्श का अधिकार
  2. लघु जल निकायों की योजना और प्रबंधन
  3. प्रस्तावित लाइसेंस/खानों के लिए पट्टा और गौण खनिजों के दोहन के लिए रियायत देने के लिए अनिवार्य सिफारिशें
  4. मादक द्रव्यों की बिक्री/खपत का विनियमन
  5. लघु वनोपज का स्वामित्व
  6. भूमि हस्तान्तरण को रोकना और हस्तांतरित भूमि की बहाली
  7. गांव के बाजारों का प्रबंधन
  8. अनुसूचित जनजाति को पैसे उधार देने पर नियंत्रण
  9. जनजातीय उप योजना और संसाधनों सहित सामाजिक क्षेत्र के संस्थानों और पदाधिकारियों,  स्थानीय योजनाओं पर नियंत्रण

प्रश्न 6: वन के किन उत्पादनों को लघु वनोपज कहा जाता है?

उत्तर: "लघु वनोपजों" को "अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम (वन अधिकारों की मान्यता), 2006" में परिभाषित किया गया है, जिनमें वनस्पति मूल की सभी गैर-इमारती लकड़ियों, बांस, ब्रश बुड, तने, बेंत, टसर, कोकून, शहद मोम, लाख, तेंदू पत्ते, औषधीय पौधे, जड़ी बूटी, जड़ें, कंद, आदि वन उपज शामिल हैं।

 

प्रश्न 7: ग्राम सभा के सदस्य कौन हैं?

उत्तर: गांव में पंचायत की मतदाता सूची में पंजीकृत सभी मतदाता ग्राम सभा के सदस्य हैं।

 

प्रश्न 8: पेसा अधिनियम के अंतर्गत एक गांव का गठन कैसे किया जाता है?

उत्तर: आमतौर पर राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित एक बस्ती या बस्तियों के एक समूह या एक पुरवा अथवा पुरवों के एक समूह को मिलाकर एक गांव का गठन किया जाता है।

 

प्रश्न 9: पेसा अधिनियम के अंतर्गत ग्राम सभा का गठन कैसे किया जाता है?

उत्तर: पेसा अधिनियम के अनुसार, हर गांव में एक ग्राम सभा होगी।

 

प्रश्न 10: ग्राम सभा का सचिव कौन होता है?

उत्तर: ग्राम पंचायत के सचिव ग्राम सभा के भी सचिव होते हैं।

 

प्रश्न 11: ग्राम सभा की गणपूर्ति (कोरम) कैसे होगी?

उत्तर: ग्राम सभा की गणपूर्ति राज्य पेसा नियम, राज्य पंचायती राज अधिनियम और राज्य पंचायती राज नियम के अनुसार होगी। उदाहरण के लिए, राजस्थान में गणपूर्ति ग्राम सभा के कुल सदस्यों का 10% है। आंध्र प्रदेश में गणपूर्ति ग्राम सभा के सदस्यों की एक तिहाई से  कम नहीं होनी चाहिए, जिनमें कम से कम 50% अनुसूचित जनजाति के सदस्य होंगे। महाराष्ट्र में गणपूर्ति कुल सदस्यों का पच्चीस प्रतिशत या सौ, में से जो भी कम हो, से होती है।

प्रश्न 12: एक वर्ष में ग्राम सभा की कितनी बैठकें आयोजित करना अनिवार्य है?

उत्तर: ग्राम सभा की अनिवार्य बैठकों की संख्या राज्य पेसा नियम, राज्य पंचायती राज अधिनियम और राज्य पंचायती राज नियम के अनुसार होगी। कई राज्यों में एक वर्ष में ग्राम सभा की न्यूनतम चार अनिवार्य बैठकों का आयोजन करना अनिवार्य है।

 

प्रश्न 13: ग्राम सभा की एक विशेष बैठक कब बुलाई जा सकती है?

उत्तर: ग्राम सभा की अनिवार्य बैठकों के अलावा, राज्य पेसा नियम, राज्य पंचायती राज अधिनियम और राज्य पंचायती राज नियम के प्रावधानों के अनुसार विशेष बैठकें भी आयोजित की जा सकती हैं। सामान्य रूप से यह ग्राम सभा की आम सभा की बैठक में, इस संबंध में कोई निर्णय लेने पर या ग्राम पंचायत द्वारा कोई ऐसा प्रस्ताव प्राप्त करने पर, जिस पर ग्राम सभा की राय आवश्यक हो अथवा ग्राम सभा के सदस्यों के एक निर्धारित प्रतिशत या संख्या द्वारा एक विशेष बैठक के लिए सचिव को लिखित मांग प्रस्तुत करने पर बुलाई जाती है ।

 

प्रश्न 14: दो या दो से अधिक ग्राम सभाओं की एक संयुक्त बैठक कब बुलाई जा सकती है?

उत्तर: एक ऐसी परियोजना या प्रस्ताव पर निर्णय लेने के लिए जिसका एक से अधिक गांवों पर प्रभाव हो सकता है और एक से अधिक ग्राम सभाओं की राय लेने की आवश्यकता हो, दो या अधिक ग्राम सभाओं की एक संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है।

 

प्रश्न 15: क्या एक ग्राम सभा अपनी समिति(यों) का गठन कर सकती है?

उत्तर: एक ग्राम सभा, शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने, लघु वन उपजों, गांव के बाजारों के प्रबंधन, मादक द्रव्यों की बिक्री या खपत, पैसा उधार देने पर नियंत्रण और जल निकायों के प्रबंधन जैसे कार्यों को पूरा करने के लिए अपनी समिति (यों) का गठन कर सकती है। ग्राम सभा द्वारा एक प्रस्ताव पारित कर किसी भी समय समितियों को सौंपे गए कर्तव्यों को संशोधित किया जा सकता है। स्थायी समितियों को ग्राम सभा के निर्देशों के अनुसार कार्य करना चाहिए। संबंधित ग्राम सभा की सहमति से दो या दो से अधिक पेसा गांवों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक संयुक्त समिति गठित की जा सकती है।

 

प्रश्न 16: ग्राम सभा कोष (निधि) क्या है?

उत्तर: ग्राम सभा एक कोष निधि (ग्राम सभा कोष कहा जा सकता है) रख सकती है, जो ग्राम सभा को सौंपे गए कई प्रबंधन कार्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक हो। कोष निधि सरकारी या गैर-सरकारी संगठनों से नकद या माल के रूप में योगदान  लेकर अथवा गांवों में श्रम के मूल्य के रूप में एकत्रित की जा सकती है।

 

 

प्रश्न 17: पेसा के अंतर्गत विवाद समाधान के क्या प्रावधान हैं?

 

उत्तर: ग्राम सभा सुरक्षा और विवाद समाधान के परंपरागत तरीके को संरक्षित करने के लिए सक्षम है। पेसा कानून के मुताबिक, विवाद समाधान ग्राम समुदाय के कार्यक्षेत्र में है।. इन विवादों में संपत्ति, भूमि, फसलों, भूमि सीमा, विरासत, सुखभोग अधिकारों, सामुदायिक संसाधनों के बंटवारे, परंपरागत प्रथाओं और उपयोगों, जादू, टोना, आदि विषयों सहित विश्वासों की श्रृंखला से जुड़े मामलों और व्यक्तियों, संस्थाओं और राज्य के किसी भी तरह के ऋण, छेड़छाड़, फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों के किसी भी प्रकार के मामूली विवाद शामिल हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, राजस्थान पेसा नियम, 2011 विवाद समाधान और कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक शांति समिति के गठन का प्रावधान करता है। ग्राम सभा के निर्देश पर, शांति समिति विवाद को हल करने की कोशिश करती है और ग्राम सभा को या ग्राम सभा के अनुमोदन से नामित मजिस्ट्रेट को इसकी रिपोर्ट करती है। ऐसे विवादों का समाधान रिवाजों और परंपराओं के अनुसार तथा खुली सुनवाई के माध्यम से होगा। शांति समिति के प्रस्तावों पर सभी निर्णय बहुमत के आधार पर ग्राम सभा द्वारा लिए जाएंगे।  जहां तत्काल कार्रवाई आवश्यक हो उसे छोड़कर, गांव में शांति या कानून व्यवस्था के आदेश के उल्लंघन के किसी भी खतरे के मामले में स्थानीय पुलिस, ग्राम सभा या शांति समिति को रिपोर्ट करेगी। पुलिस केवल गंभीर अपराध (भारतीय दंड संहिता, 1860 के अंतर्गत के दो वर्ष से अधिक सजा के प्रावधान के साथ) के मामले दर्ज करेगी और ग्राम सभा/शांति समिति को उसकी एक प्रतिलिपि भेजेगी। ग्राम सभा अपनी अगली या विशेष बैठक में संघर्ष को हल करने की कोशिश करेगी।

 

प्रश्न 18: साझा संपत्ति संसाधनों के प्रबंधन में ग्राम सभा की क्या जिम्मेदारियां हैं?

 

उत्तर: 

  1. स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार गांव के पानी, साझा भूमि, सामुदायिक वन, चरागाह, लघु खनिजों, आदि जैसे सभी सामुदायिक संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन
  2. ग्राम सभा सुनिश्चित करेगी कि सामुदायिक के संसाधनों का एक ऐसे तरीके से उपयोग किया जाता है जिससे लोगों की आजीविका के साधनों और समानता में सुधार हो।

 

प्रश्न 19: भूमि अधिग्रहण में ग्राम सभा की क्या जिम्मेदारी है?

 

पेसा अधिनियम में प्रावधान है कि अनुसूचित क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के लिए भूमि का अधिग्रहण करने से पहले या ऐसी परियोजनाओं से प्रभावित व्यक्तियों की पुनर्बहाली या पुनर्वास से पहले उचित स्तर पर ग्राम सभा या पंचायत से परामर्श किया जाएगा। संबंधित परियोजना अधिकारी प्रस्ताव के साथ सभी प्रासंगिक लिखित जानकारियों को ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत करेंगे, जिनमें  निम्नलिखित शामिल होंगे:

 

  1. परियोजना के संभावित प्रभाव सहित प्रस्तावित परियोजना की संपूर्ण रूपरेखा;
  2. प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण;
  3. गांव में नए लोगों के बसने की संभावना और क्षेत्र और समाज पर इसका संभावित प्रभाव; तथा
  4. गांव के लोगों के लिए प्रस्तावित भागीदारी, मुआवजा की राशि और रोजगार के अवसर

 

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद, ग्राम सभा प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण और प्रभावित या विस्थापित लोगों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन योजना के बारे में एक सिफारिश करेगी। भू-अधिग्रहण अधिकारी के ग्राम सभा की सिफारिशों के साथ सहमत न होने की स्थिति में वह मामले को विचार और निर्णय के लिए फिर से ग्राम सभा के पास भेजेगा/भेजेगी। असहमत भूमि अधिग्रहण अधिकारी या परियोजना अधिकारी, ऐसा करने के लिए कारणों में दर्ज करने के बाद ग्राम सभा की सिफारिशों के खिलाफ एक आदेश पारित कर सकते हैं और उसके बारे में ग्राम सभा को सूचित किया जाएगा। औद्योगिक परियोजनाओं के मामले में, किसी भी गतिविधि के शुरू करने से पहले उन सभी ग्राम सभाओं से परामर्श किया जाएगा, जिनके ऐसी परियोजनाओं से प्रभावित होने की संभावना हो।

 

राज्य का राजस्व विभाग जरूरी भूमि अधिग्रहण से पहले, सभी जिला कलेक्टरों को संबंधित ग्राम सभा से परामर्श करने के लिए निर्देश जारी कर सकता है।

 

प्रश्न 20: ग्राम सभा जनजातीय भूमि हस्तान्तरण के अन्य रूपों को रोकने के लिए क्या कर सकती है?

 

  • : पेसा अधिनियम ग्राम सभा को अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि हस्तान्तरण को रोकने और अनुसूचित जनजाति की अवैध रूप से हस्तांतरित भूमि बहाल करने के लिए उचित कार्रवाई करने के लिए सशक्त करता है। ग्रामसभा को सुनिश्चित करना चाहिए कि अनुसूचित जनजाति की कोई भूमि गैर-अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को न सौंपी जाए। अगर ग्राम सभा की राय है कि अनुसूचित जनजाति से संबंधित भूमि को हस्तांतरित  करने के प्रयास किए जा रहे है, तो यह ऐसे मामलों की गहराई में जाएगी और संकल्प पारित कर सकते है कि ऐसे प्रयास को रोकने की कोशिश की जानी चाहिए। यदि ग्राम सभा पाती है कि अनुसूचित जनजाति के सदस्य से संबंधित कोई भी भूमि किसी गैर-अनुसूचित जनजाति के अवैध कब्जे में है, तो यह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मूल स्वामी के ऐसी भूमि के अधिकार को बहाल करेगी। ग्राम सभा भूमि विवाद को निपटाते समय पारंपरिक विवाद समाधान विधि को अपनाएगी। सही निर्णय लेने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारी द्वारा ग्राम सभा को भूमि रिकार्ड उपलब्ध कराया जाएगा।

 

राज्य सरकार इस बारे में विस्तृत प्रक्रिया प्रदान करेगी कि हस्तांतरित भूमि मूल भू-स्वामियों को कैसे बहाल की जाएगी। उदाहरण के लिए, राजस्थान पेसा नियम, 2011, के अनुसार आदिवासियों की अवैध तरीके से अधिगृहीत जमीन से कब्जा हटाने के लिए, पंचायत समिति राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (धारा -15) के प्रावधानों के अंतर्गत तहसीलदार की शक्तियों का प्रयोग करेगी। हिमाचल प्रदेश पेसा नियम 2011 के अंतर्गत, अगर ग्राम सभा पाती है कि एक अनुसूचित जनजाति के स्वामित्व वाली कोई भूमि एक गैर-अनुसूचित जनजाति के अवैध कब्जे में है, तो ऐसी भूमि पर उस व्यक्ति के कब्जे की पुनर्बहाली के लिए जिससे यह मूल रूप से संबंध रखती थी ग्राम पंचायत के प्रधान के माध्यम से मामले को राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारी तक ले जा सकती है

 

प्रश्न 21: पेसा अधिनियम के अंतर्गत ऋण को नियंत्रित करने के लिए क्या प्रावधान हैं?

 

उत्तर: पेसा में राज्य विधानमंडल द्वारा ग्राम सभा को ऋण के लेन-देन पर नियंत्रण रखने के लिए सशक्त बनाने का प्रावधान है। ऋण में, सरकारी, सहकारी समितियों, महाजनों, बैंकों और अन्य संस्थानों द्वारा दिए जाने वाले ऋण शामिल हैं। ग्राम सभा अनुसूचित जनजातियों के संबंध में के ऋण के लेन-देन और इससे संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए एक ऋण राहत समिति का गठन कर सकती है। अगर एक ऋणी को एक ऋण देने वाली संस्था या साहूकार द्वारा परेशान किया जाता है और ब्याज की अति उच्च दर लगाई जा रही है तो वह मानले को ग्राम सभा के संज्ञान में ला सकता है।  ग्राम सभा, ऋण राहत समिति को ग्राम सभा/समुदाय संगठक के समर्थन से इस तरह की शिकायतों की जांच और इसके निर्णय के लिए ग्राम सभा के समक्ष एक रिपोर्ट पेश करने के लिए अधिकृत कर सकती है। ग्राम सभा, विशेष रूप से आदिवासियों के मामले में, एक बैंक, सोसायटी या किसी व्यक्तिगत साहूकार को  ग्राम सभा को ऋण का विवरण बताने के बाद ऋण वितरित करने या भुगतान करने की हिदायत दे सकती है। यह शोषण के किसी भी मामले के बारे में सरकार को सूचित कर सकती है जिससे राजस्व, बैंकिंग, और सहकारिता के संबंधित विभाग सुधारात्मक कार्रवाई कर सकें। ग्राम सभा गांव में मजदूरों के सभी प्रकार के समझौतों की समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने में सक्षम है कि ऋणदाता उधार के पैसे के एवज में कोई बेगार नही करा रहा है। हालांकि, संबंधित राज्य सरकार को इस संबंध में नियम बनाने की आवश्यकता है। राजस्थान में ग्राम पंचायतों को सहायक रजिस्ट्रार की शक्तियां आवंटित की गई हैं और पंचायत समिति को राजस्थान ऋण अधिनियम, 1963 के अंतर्गत रजिस्ट्रार के अधिकार दिये गए हैं।

प्रश्न 22: पेसा अधिनियम के अंतर्गत लघु वनोपजों के स्वामित्व से संबंधित क्या प्रावधान किए गए हैं?

 

उत्तर: पेसा अधिनियम के अंतर्गत ग्राम सभा को लघु वनोपजों (लघु वनोपजों ) का स्वामित्व सौंपा गया है। ग्राम सभा से पेड़ों या पौधों के संरक्षण के लिए कदम उठाने में सक्षम है, जो लघु वन उपज देते हैं और साथ ही लुप्तप्राय पौधों की प्रजातियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संग्रह या वनस्पति सामग्री या उत्पादों की निकासी पर प्रतिबंध लगाने में भी सक्षम है। राज्य सरकारों को इस संबंध में नियम बनाने की आवश्यकता है। एक या अधिक ग्राम सभाएं साथ मिलकर, वन विभाग के परामर्श से राज्य सहकारी या राज्य के स्वामित्व वाले लघु वनोपजों  व्यापार में शामिल अन्य एजेंसियों से, लघु वनोपजों या अन्य वस्तुओं के विनिमय दरों की वसूली के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर सकती हैं। ग्राम सभा संग्राहक या व्यापारी द्वारा लघु वनोपजों पर देय रॉयल्टी निर्धारित कर सकती है। ऐसे तरीकों से उत्पन्न राशि को ग्राम सभा कोष में जमा किया जाएगा। ऐसे किसी भी व्यक्ति जो ग्राम सभा का सदस्य नहीं है या किसी भी विभाग अथवा संस्था द्वारा लघु वनोपजों की किसी भी वस्तु के संग्रह और परिवहन के लिए ग्राम सभा से अनुमति लेना आवश्यक है। राज्य एजेंसियों द्वारा किसी भी लघु वनोपज  के व्यापार के आयोजन के लिए ग्राम सभा का  पूर्व अनुमोदन आवश्यक है। ऐसे व्यापार से उत्पन्न होने वाली शुद्ध लाभ पर ग्राम सभा और संग्राहक का अधिकार होगा।ग्राम सभा लघु वनोपजों का संग्रह करने वाले समूहों के सदस्यों के विवादों का निर्णय कर सकती हैं।

 

प्रश्न 23: पेसा अधिनियम के अंतर्गत ग्राम सभा/पंचायती राज संस्थाओं को गौण खनिजों पर नियंत्रण के संबंध में क्या शक्तियां दी गई है?

 

उत्तर: पेसा अधिनियम के अंतर्गत, पूर्वेक्षण लाइसेंस या अनुसूचित क्षेत्रों में नीलामी द्वारा गौण खनिजों के दोहन के लिए रियायत के अनुदान और गौण खनिजों के लिए खनन पट्टे प्रदान करने से पहले उचित स्तर पर ग्राम सभा और पंचायत की सिफारिश अनिवार्य है। परामर्श की अनिवार्य परामर्श के रूप में व्याख्या की जानी चाहिए। प्रस्तावित गतिविधि के क्षेत्र, प्रभाव, इसके आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव, पुनर्वास और टिकाऊ आजीविका योजनाओं के बारे में पूर्ण तथ्यों को ग्राम सभा के समक्ष रखा जाना चाहिए। अगर समय के किसी भी बिंदु पर यह पाया जाता है कि संबंधित अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी गलत है या जानकारी छिपाई गई है, तो ग्राम सभा को सिफारिश वापस लेने का अधिकार होगा। संबंधित प्राधिकरण को उस परियोजना, जिसके लिए उसने ग्राम सभा की सिफारिश प्राप्त की है, की प्रगति के बारे में ग्राम सभा को रिपोर्ट करनी होगी। राज्य पेसा नियम पेसा अधिनियम के इस प्रावधान को आगे विस्तारित करेगा।

 

 

  • उदाहरण के लिए, राजस्थान पेसा नियम में, एक ग्राम पंचायत क्षेत्र में पड़ने वाली खानों के मामले में ग्राम सभा को एक से अधिक ग्राम पंचायत क्षेत्र में पड़ने वाली खानों के लिए पंचायत समिति को और एक से अधिक पंचायत समिति के क्षेत्र में पड़ने वाली खानों के मामले में जिला परिषद को गौण खनिजों के दोहन के लिए रियायत प्रदान की सिफारिश करने का अधिकार दिया गया है। खान विभाग खनन इंजीनियरों को गौण खनिजों के खनन पट्टों के नवीकरण से पहले अनिवार्य रूप से संबंधित ग्राम सभा से सिफारिशें प्राप्त करने का आदेश जारी करेगा।

 

 महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में ग्राम सभाएं अपने क्षेत्र में पाई जाने वाली मिट्टी, पत्थर, रेत, सहित सभी गौण खनिजों की योजना बनाने और खुदाई और उपयोग को नियंत्रित करने के लिए सक्षम है। ग्रामीण ग्राम सभा की अनुमति के साथ पारंपरिक प्रथा के अनुसार अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए गौण खनिजों का उपयोग कर सकते हैं। अगर किसी गौण खनिज के दोहन के लिए किसी भी सरकारी विभाग द्वारा अनुमति दी जाती है, तो उक्त सरकारी विभाग के लिए ग्राम सभा की आवश्यक सहमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

 

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में, केवल अनुसूचित जनजाति के स्थानीय सदस्य या ऐसी सोसायटियां जिनमे विशेष रूप से स्थानीय अनुसूचित जनजाति के सदस्य शामिल हों, को गौण खनिजों और नीलामी द्वारा गौण खनिजों के दोहन के लिए रियायत के अनुदान के लिए पूर्वेक्षण लाइसेंस या खनन पट्टा प्राप्त करने के लिए हकदार होंगे।

 

प्रश्न 24: पेसा अधिनियम के अंतर्गत ग्राम सभा को मादक द्रव्यों की बिक्री और खपत को नियंत्रित करने के लिए कौन सी शक्तियां दी गई हैं?

उत्तर: ग्राम सभा को मादक पदार्थों पर निषेध लागू करने या उसकी बिक्री या खपत को विनियमित या सीमित करने के अधिकार से संपन्न किया गया है। ग्राम सभा निम्नलिखित कार्यों को पूरा करेगी:

  1. मादक पदार्थों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना या उनकी तैयारी या बिक्री या एक नशा की खपत पर प्रतिबंध लगाना।
  2. किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ के भंडारण या परिवहन आदि पर प्रतिबंध लगाना।
  3. महुआ, खांड़ या किसी भी अन्य सामग्री जिसका शराब बनाने में इस्तेमाल किया जाता है, उसके गांव या बाजार में बिक्री पर रोक लगाना।

 

ग्राम सभा मादक द्रव्यों से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए एक नशा नियंत्रण समिति का गठन कर सकती है। राज्य सरकारों को इस संबंध में विस्तारित नियम और प्रक्रियाएं तैयार करनी होंगी।

 

उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में, गांव में शराब की दुकान खोलने के लिए कोई भी लाइसेंस प्रदान करने से पहले ग्राम सभा से परामर्श किया जाएगा। ग्राम सभा चार सप्ताह के भीतर संकल्प के रूप में अपनी राय व्यक्त करेगी, जो राज्य सरकार पर बाध्यकारी होगी।

लाइसेंस केवल स्थानीय अनुसूचित जनजाति को प्रदान किया जाएगा। ग्राम सभा, एक गांव में अनुसूचित जनजाति को उनके निजी उपभोग के लिए पारंपरिक शराब बनाने/निकालने की मात्रा का निर्धारण करेगी, लेकिन यह बिक्री के लिए नहीं होगी।

 

हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में, ग्राम सभा अपनी सीमाओं के भीतर किसी भी नशे की बिक्री और खपत पर निषेध या विनियमन या प्रतिबंध लागू करने में सक्षम हैं। ग्राम सभा, मादक द्रव्यों से संबंधित शिकायतों की जांच करने और सभा के सदस्यों के लाभ के लिए मादक द्रव्यों के नियंत्रण के संबंध में उपयुक्त सुझाव देने के लिए, कम से कम 50 प्रतिशत महिला सदस्यों के साथ एक नशा नियंत्रण समिति का गठन कर सकती है।

 

राजस्थान में ग्राम सभा, मादक द्रव्यों के अवैध व्यापार में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने, निषेध को बढ़ावा देने और शराब की बिक्री के स्थानों के परिवर्तन के लिए संकल्प पारित कर सकती हैं। निषेध के संबंध में ग्राम सभा के प्रस्तावों की प्रमाणित प्रतिलिपि कलेक्टर और आबकारी आयुक्त को भेजी जाएगी। कलेक्टर स्थिति की जांच करने के लिए एक अधिकारी तैनात करेगा, जो तहसीलदार के पद से नीचे का नहीं होगा, जिसे आबकारी आयुक्त के पास भेजा जाएगा, जो ग्राम सभा के प्रस्ताव पर कार्रवाई आरंभ करेगा। जन्म, विवाह, आदि विशेष अवसरों पर, ग्राम सभा सीमित मात्रा में स्थानीय शराब रखने के लिए तारीख के साथ परमिट जारी कर सकती है। मादक द्रव्यों के बिक्री और नियमन के प्रस्ताव पर विचार करते समय, महिलाओं के विचार निर्णायक होंगे

ग्राम सभा सार्वजनिक स्थानों में मादक द्रव्यों के सेवन और मादक द्रव्यों के सेवन के बाद घरेलू हिंसा के मामले में जुर्माना लगा सकती है।

 

  • , शराब परमिट, गौण खनिजों, पैसे उधार पर निर्णय लेने के लिए ग्राम सभा को कितनी बार बैठक करनी चाहिए?

 

प्रश्न 25: पेसा अधिनियम के अंतर्गत गांव बाजारों का प्रबंधन करने के लिए ग्राम सभा को सशक्त बनाने के  क्या प्रावधान किए गए हैं?

 

उत्तर: ग्राम सभा गांव के बाजारों को नियंत्रित करने और उनका प्रबंधन करने में सक्षम है। ग्राम सभा गांव बाजार के प्रबंधन के लिए निम्नलिखित सहित विभिन्न गतिविधियां आरंभ कर सकती है:

  1. ग्राम सभा, ग्राम सभा द्वारा उसे सौंपे गए कार्यों को पूरा करने के लिए एक गांव बाजार समिति का गठन कर सकती है।

 

  1. दुकानदारों और उपभोक्ताओं के लिए बाजार में पानी, शेड और अन्य भौतिक सुविधाएं उपलब्ध कराना।

 

  1. बाजार में हानिकारक वस्तुओं के प्रवाह और बिक्री पर निषेध।
  2. सुनिश्चित करना कि वजन, माप और लेनदेन सही हैं।

 

  1. विभिन्न वस्तुओं की लगाई गई कीमतों के बारे में जानकारी प्राप्त करना और उसे साझा करना।
  2. धोखाधड़ी या गलत कीमतों या शोषण सहित सभी अनुचित व्यवहारों का  निषेध।
  3. बाजार या उसके आसपास के क्षेत्रों में जुआ, सट्टेबाजी, भाग्य परीक्षण, मुर्गों की लड़ाई, आदि का निषेध।
  4. बाजार के दुकानदारों पर शुल्क लगाया जा सकता है।
  5. ग्राम सभाएं ऐसे बाजारों का प्रबंधन करने के लिए एक संयुक्त समिति का गठन कर दो या दो से अधिक गांवों के लिए एक आम बाजार की व्यवस्था कर सकती हैं।
  6. बाजार समितियां बाजार के प्रबंधन के संबंध में अपनी गतिविधियों के लिए जवाबदेह होंगी। व्यापार, आदि से उत्पन्न होने वाले बाजार से संबंधित किसी भी विवाद के मामले में ग्राम सभा का निर्णय अंतिम होगा

 

 

प्रश्न 26: अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी(वन अधिकारों की मान्यता)  अधिनियम, 2006 या वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के अंतर्गत भूमि अधिकार के विभिन्न प्रकार क्या हैं?

 

उत्तर:  वन भूमि अधिकार दो प्रकार के होते हैं। एक आदिवासियों या अन्य परंपरागत वनवासी (जो वन क्षेत्रों में 75 वर्ष से रह रहे हों) के कब्जे की वन भूमि पर एक व्यक्ति के अधिकार की मान्यता, जो 13, दिसंबर 2005 के अनुसार अधिकतम चार हेक्टेयर है। दूसरा चारागाहों, वन क्षेत्रों, आदि या लघु वनोपजों के निपटान, जल निकायों में मछली पकड़ने के अधिकार, सामुदायिक वन संसाधनों के प्रबंधन और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के वन्य जीवन बस्ती के अधिकारों के संरक्षण पर सामुदायिक वन अधिकार है।

 

प्रश्न 27: ग्राम सभा सामाजिक क्षेत्रों के पदाधिकारियों और स्थानीय संस्थाओं पर अपना नियंत्रण कैसे रख सकती है?

 

उत्तर: ग्राम सभा की शक्तियों में क्षेत्र के पदाधिकारी या संस्थाओं की किसी भी गतिविधि पर जानकारी;योजनाओं या कार्यक्रमों और लाभार्थियों की पात्रता के मानदंडों का ब्यौरा;विभागों के भौतिक या वित्तीय लक्ष्य या अन्य विवरण, पर एक रिपोर्ट मांगना शामिल है। ग्राम सभा, ग्राम सभा के सदस्यों के लाभ के लिए किसी भी मुद्दे या कार्यसूची मद या गतिविधियों की स्थिति पर स्थिति का मूल्यांकन करने या यदि किसी भी प्रश्न का जवाब देने के लिए संबंधित पदाधिकारी को ग्राम सभा की बैठकों में भाग लेने का निर्देश दे सकती हैं।

 

प्रश्न 28: क्या ग्राम सभा, अपने क्षेत्र में सक्रिय गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की निगरानी कर सकती हैं?

उत्तर: पेसा अधिनियम के अंतर्गत ग्राम सभा के पास सामाजिक क्षेत्रों की सभी संस्थाओं और कार्यकर्ताओं पर नियंत्रण करने की शक्ति है। यह प्रावधान व्यापक है और इसमें गैर-सरकारी और अन्य स्वैच्छिक संगठनों सहित सभी संस्थानों को शामिल किया गया है।

ग्राम सभा अपने अधिकार क्षेत्र में काम करने वाले स्वैच्छिक और गैर सरकारी संगठनों से गांव में उनकी गतिविधियों पर सूचना देने के लिए कह सकती है; उनकी गतिविधियों को नियंत्रित कर सकती है और उनसे समुदाय के लिए सेवाएं प्रदान करने या विकास परियोजनाओं के लिए योगदान करने के लिए अनुरोध कर सकती है।

प्रश्न 29. कितने जिलों को, पूरी तरह से और आंशिक रूप से, पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों के रूप में अधिसूचित किया गया है?

उत्‍तर:- 45 जिले पूरी तरह से और 63 जिले आंशिक रूप से पांचवी अनुसूची क्षेत्रों के रूप में अधिसूचित किए गए हैं।

प्रश्न 30. किस राज्य में पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत अधिकतम जिले हैं?

उत्‍तर:- चंडीगढ़ और झारखंड में से प्रत्‍येक के अधिकतम 13 जिले पांचवी अनुसूची क्षेत्रों में पूरी तरह से शामिल किए गए हैं और मध्‍य प्रदेश के अधिकतम 16 जिले आंशिक रूप से पांचवी अनुसूची क्षेत्रों में शामिल किए गए हैं।

प्रश्न 31 कितने राज्यों ने अपने पेसा नियमों को अधिसूचित किया है?

उत्‍तर:- अब तक पांच राज्‍यों ने अपने पेसा नियम अधिसूचित कर दिए हैं।

 

प्रश्न 32 किन राज्यों ने अपने पेसा नियमों को अधिसूचित कर दिया है?

उत्‍तर:- आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, महाराष्‍ट्र, राज्‍स्‍थान और तेलंगाना ने अपने-अपने पेसा नियम अधिसूचित कर दिए हैं।

प्रश्न 33 कितनी ग्राम पंचायतों को पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के अंतर्गत शामिल किया गया है?

उत्‍तर:- कुल 25393 ग्राम पंचायतें पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में शामिल हैं।

 

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