पेसा नियम और दिशानिर्देश पेसा नियम और दिशानिर्देश

आदर्श पेसा (पीईएसए) नियम

केन्द्रीय विधान, ‘पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 पेसा’ तथा राज्य पंचायत राज अधिनियमों और संबंधित विधियों में राज्यों द्वारा अब तक किए गए संशोधन पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों के लिए व्यापक ढांचा उपलब्ध कराते हैं । इस संबंध में प्रक्रियाएं और पद्धतियां तैयार करने के लिए, पंचायती राज्य मंत्रालय ने स्व. श्री बी.डी. शर्मा की अध्यक्षता में एक उप-समिति का गठन किया था जिसका उद्देश्य ग्राम सभाओं को पेसा में यथापरिकल्पित शक्तियां प्रदान करने के लिए आदर्श दिशा-निर्देश तैयार करना था । इस उप-समिति द्वारा तैयार किए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर, पंचायती राज मंत्रालय ने ‘आदर्श पेसा नियम’ तैयार किए तथा उन्हें पांचवीं अनुसूची क्षेत्र वाले राज्यों को 14 दिसम्बर, 2009 को परिचालित किया ताकि वे अपने नियम तैयार कर सकें । सतत् प्रयासों के परिणामस्वरुप, पांच राज्यों अर्थात् आंध्र प्रदेश हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और तेलंगाना ने उनके राज्यों के विशिष्ट पेसा नियम अधिसूचित किए हैं । शेष राज्य नियमों को तैयार करने की प्रक्रिया की समाप्ति की विभिन्न अवस्थाओं में हैं ।

आदर्श पेसा नियमों की मुख्य विशेषताएं

  • ग्राम पंचायत को ग्राम सभा की कार्यकारी समिति माना जाएगा । ग्राम पंचायत का सचिव ग्राम सभा का सचिव माना जाएगा तथा ग्राम सभा दो माह में कम-से-कम एक बार बैठक आयोजित करेगी ।
  • ऐसे व्यक्ति को, जो अनुसूचित जनजाति का सदस्य होगा, सर्वसम्मति से एक वर्ष के लिए ग्राम सभा की बैठकों के लिए अध्यक्ष चुना जाएगा । सर्वसम्मति न होने की दशा में, उपस्थित सदस्यों में से सबसे अधिक आयु की अनुसूचित जनजाति की महिला अध्यक्ष होगी ।
  • ग्राम सभा की बैठकों के लिए गणपूर्ति कुल सदस्यों की संख्या का बीस प्रतिशत होगी । महिलाओं के लिए अलग गणपूर्ति होगी, जो सामान्य गणपूर्ति का एक-तिहाई होगी ।
  • ग्राम सभा गांव के कार्यकरण के विभिन्न पहलुओं के संबंध में उत्तरदायित्व के निर्वहन के उद्देश्य से स्थायी समितियों का गठन कर सकेगी जैसे शांति समिति, न्याय समिति, संसाधन आयोजना और प्रबंधन समिति, मद्यपान नियंत्रण समिति, ऋण नियंत्रण समिति, बाजार समिति, सभाकोष  समिति तथा ग्राम सभा द्वारा उपयुक्त समझी जाने वाली कोई अन्य समिति, जिनके सदस्यों का चयन ग्राम सभा के सदस्यों में से ग्राम सभा की खुली बैठक में किया जाएगा । इसके अलावा, आवश्यकता के अनुसार अस्थायी और तदर्थ समितियों का गठन भी किया जा सकेगा । सभी स्थायी समितियों का कार्यकाल एक या दो वर्ष होगा, जैसा ग्राम सभा द्वारा निर्णय लिया जाए ।
  • यदि किसी अधिनियम के अंतर्गत किसी विषय जैसे वन, सिंचाई प्रबंधन आदि पर किसी सरकारी विभाग द्वारा कोई निकाय अथवा समिति गठित की गई है, तो उसे उस विषय पर ग्राम सभा की स्थायी समिति माना जाएगा । संबधित अधिनियम में किसी उपबंध के होते हुए, वह निकाय अथवा समिति ग्राम सभा के प्रति उत्तरदायी होगी ।
  • ग्राम सभा एक ग्राम सभा कोष का अनुरक्षण करेगी जिसमें किसी भी रुप में प्राप्त हुए अंशदान को रखा जाएगा जिसमें नकद अथवा वस्तुओं के रुप में स्वैच्छिक अंशदान तथा ग्रामवासियों की मजदूरी; सूक्ष्म वन उत्पादों, सूक्ष्म खनिजों आदि के लिए सरकार के माध्यम से प्राप्त राशि; और ग्राम सभा द्वारा संसाधनों के उपभोग पर अधिरोपित प्रशुल्क अथवा उदग्रहित जुर्माने शामिल होंगे । ग्राम सभा के पास अपने निर्णयों के अनुसार इसके उपयोग का पूर्ण अधिकार होगा ।
  • ग्राम सभा द्वारा विवाद निपटान की प्रक्रिया को भी आदर्श नियमों में सूचीबद्ध किया गया है ।
  • ग्राम सभा यह सुनिश्चित करेगी कि संसाधनों का उपयोग इस प्रकार से हो कि:
  1. आजीविका के साधनों को बनाए रखा जा सके ।
  2. लोगों के मध्य असमानता में वृद्धि न हो ।
  3. संसाधन कुछ ही लोगों तक सीमित न रहने पाएं ।
  • ग्राम सभा यह सुनिश्चित करेगी कि अनुसूचित जनजातियों से संबंधित कोई भी भूमि गैर-अनुसूचित जनजातियों के व्यक्तियों को अंतरित न होने पाए । यह भूमि संबंधी लेन-देनों की जांच करने के लिए सक्षम होगी अथवा किसी शिकायत के आधार पर अथवा स्वयं अपनी ओर से ऐसा करने के लिए शांति समिति को प्राधिकृत कर सकेगी । यदि ग्राम सभा की यह राय है कि अनुसूचित जनजातियों से संबंधित भूमि पर कब्जा किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं, तो यह लेन-देन को प्रतिषिद्ध करने के लिए अनुदेश जारी करेगी तथा ऐसे मामलों में इसका निर्णय अंतिम होगा ।
  • ग्राम सभा को भूमि-अधिग्रहण; शांति और सुरक्षा तथा विवाद निपटान;  प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन; कृषि और भूमि; खान और खनिज; मद्यपान नियंत्रण; सूक्ष्म वन उत्पाद; बाजारों का प्रबंधन; साहूकारी; लाभार्थियों की पहचान; योजनाओं के अनुमोदन; सामाजिक क्षेत्र की स्कीमों की समीक्षा तथा स्थानीय संस्थाओं जैसे विद्यालयों और अस्पतालों आदि की समीक्षा से संबंधित समस्त निर्णयों में अनिवार्य रुप से शामिल किया जाएगा ।
  • ग्राम सभा (i) जन्म (ii) मृत्यु (iii) विवाहों (iv) त्योहारों (v) आजीविका की तलाश में गांव से बाहर जाने वाले व्यक्तियों के विवरणों के लिए एक पृथक रजिस्टर का अनुरक्षण करने के लिए सक्षम है ।
  • ग्राम पंचायत के लिए अपने क्षेत्रों में किए गए कार्यों के लिए ग्राम सभा द्वारा लिए गए समस्त धन के उपयोग का प्रमाण-पत्र उससे प्राप्त करना अनिवार्य है ।
  • यदि ग्राम सभा की यह राय है कि कोई राज्य विधान प्रथागत विधि, सामाजिक और धार्मिक रिवाजों और समुदाय संसाधनों की पारंपरिक प्रबंधन प्रक्रियाओं के अनुरुप नहीं है, तो वह उस संबंध में एक संकल्प पारित करेगी और जिला कलक्टर के माध्यम से उसे राज्य सरकार को भिजवाएगी । राज्य सरकार उस पर आवश्यक कार्रवाई करेगी ।

 

आदर्श पेसा माडल की प्रति यहां उपलब्ध है