पेसा नियम और दिशानिर्देश पेसा नियम और दिशानिर्देश

पंचायती राज मंत्रालय द्वारा दिशा-निर्देश

उम्मीद की गई थी कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पेसा लोगों के स्वशासन और सशक्तिकरण का नेतृत्व करेगा। हालांकि, वांछित स्तर तक पेसा का कार्यान्वयन नहीं किया गया है।  पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र गरीबी, अशिक्षा, कमजोर बुनियादी ढांचे और खराब शासन के अंतर्गत बने हुए हैं।  पांचवीं अनुसूची के कई जिले भी उग्रवाद से प्रभावित हैं।  राज्यों द्वारा कमजोर कार्यान्वयन पंचायती राज मंत्रालय के लिए एक चिंता का विषय रहा है। मंत्रालय ने राज्यों को समयबद्ध ढंग से प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

पेसा के कार्यान्वयन पर सबसे व्यापक दिशा-निर्देशों को 21 मई 2010 को जारी किए गए थे। दिशा निर्देशों में राज्यों को निम्न सलाहें दी गई हैं:

  • आदर्श (मॉडल) पेसा नियमों को अपनाना।
  • राज्य पंचायती राज अधिनियमों में पेसा के प्रावधानों के अनुरूप संशोधन।
  • खान एवं खनिज, लघु वनोपज, आबकारी, पैसा उधार देने, आदि पर कानूनों, नियमों, कार्यकारी निर्देशों में संशोधन
  • ग्राम सभा को सशक्त बनाना और ग्राम सभा द्वावा पालन करने के लिए 2 अक्टूबर, 2009 को जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन । मिशन मोड के रूप में ग्राम सभा को सक्रिय करना।
  • पंचायत पदाधिकारियों (निर्वाचित प्रतिनिध एवं कर्मचारी) के लिए पेसा पर नियमित प्रशिक्षण का आयोजन।
  • पेसा के कार्यान्वयन की समीक्षा करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-विभागीय समिति का गठन।
  • जनजाति सलाहकार परिषदों और जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सक्रिय करना।
  • पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में प्रशासनिक मशीनरी को मजबूत बनाना।
  • राज्य निर्वाचन आयोगों को ''गांवों'' को परिसीमित करने के लिए अधिदेश ।
  • वन अधिकार अधिनियम, 2006 में दी गई लघु वनोपजों की परिभाषा को सभी कानूनों और नियमों में शामिल करना।

 पेसा के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 21 मई, 2010 को जारी दिशानिर्देश यहां देखे जा सकते हैं।